सिद्ध पीठ बक्सर में पहले दिन से ही चंद्रिका व अंबिका देवी के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
*दुर्गा सप्तशती में मां के दरबार का है उल्लेख
*वक्र ऋषि का आश्रम था बक्सर, दुर्गा सप्तशती की मेघा ऋषि ने सुनाई थी कथा
पुनीत संदेश/ संदीप कुमार मिश्र
पाटन उन्नाव। चैत्र मास के नवरात्रि के प्रथम दिन से ही शक्तिपीठ मां चंद्रिका, अंबिका देवी दरबार में भोर पहर से ही श्रद्धालुओं का आना प्रारंभ हो गया जो देर रात तक अनवरत चल रहा है श्रद्धालु पतित पावनी गंगा मां मे स्नान कर विधि विधान से चंडिका देवी मंदिर में स्थापित मां चंडिका व मां अंबिका देवी के दर्शन कर रहे,धाम में अनेकों मंदिर बने हुए हैं जिसमें देवी देवताओं व अन्य मूर्तियां स्थापित हैं। चंडिका देवी मंदिर में दो मूर्तियां स्थापित है जिन्हें चंडिका व अंबिका के रूप में माना जाता है।
चंडिका धाम की सीढियों से सटकर हमेशा गंगा का जल प्रवाहित होता है, वैसे तो धाम में हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है किंतु यह भीड़ नवरात्रि के इस पवित्र अवसर पर बढ़ जाती है। नवरात्रि के इस पवित्र अवसर पर कानपुर, रायबरेली ,फतेहपुर, इलाहाबाद ,बांदा, कौशांबी सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ-साथ दूसरे प्रदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर में प्रतिदिन तीनों पहर आरती व मां का श्रृंगार होता है।प्रातः मंदिर में 5:00 बजे आरती जो दोपहर और शाम को भी नियम पूर्वक होती है।
मां के दरबार में जो भी सच्चे मन से आता है उसकी मुरादे अवश्य पूरी होती हैं शक्तिपीठ मां चंडिका देवी धाम का पुराणों में भी वर्णन हुआ है। यहां पर तपस्वी वक्र ऋषि का आश्रम था कहां जाता है कि इन्हीं के नाम पर इस ग्राम का नाम बक्सर पड़ा था। यहां गंगा कुछ समय के लिए उत्तर मुखी प्रवाहित होने के कारण इस स्थान को काशी की तरह पवित्र माना जाता है। जिस स्थान पर मेघा ऋषि ने राजा सुरथ को दुर्गा सप्तशती सुनाई थी। इस स्थान पर भगवान श्री कृष्ण के भाई बलराम ने भी माथा टेका था। वहीं पर मां चंडिका देवी के विग्रह स्थापित किए गए थे। स्थापित दोनों विग्रह मां चंडिका व अंबिका के रूप में माने जाते हैं। मां के इस दरबार का उल्लेख दुर्गा सप्तशती में भी पाया जाता है। यह धाम जनपद उन्नाव से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बक्सर धाम पहुंचने के लिए कानपुर से वाया फतेहपुर लखनऊ से वाया मौरावां ,विहार होते हुए बक्सर धाम तथा जनपद रायबरेली से लालगंज होते हुए बक्सर धाम तक पहुंचने का मार्ग सुलभ है ,लोग मंदिर धाम तक अपने निजी वाहनों से भी बड़ी संख्या में पहुंचकर श्रद्धा नवत होते हैं।
Created On: March 23, 2026